आज चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर स्तिथ राणा पूंजा भवन में भील समाज की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस समारोह जिला मुख्यालय पर ही मनाया जाएगा । बैठक में खेमराज जी भील भट्ट कोटड़ी, शंभुलाल जी भील सेगवा, गोपाल जी भील आकोड़िया, राजुभाई भील पार्षद, नारायण जी भील नगावली, उदयलाल जी भील सरपंच भावलिया, हितेश भाई भील आंतरी, नारायण जी भील हट्टीपुरा, सुरजमल जी भील घटियावली , श्यामलाल जी भील ओछड़ी, नारायणी बाई भील सामाजिक कार्यकर्ता, उदय लाल जी भील रावतभाटा, कमलेश जी भील चितौड़गढ़ , मदन लाल जी भील आदि भील समाज के प्रतिनिधियों मौजूद रहे । #हितेश_भील_चित्तौड़गढ़ । सुनील चौहान भील निम्बाहेड़ा आदिवासी नारायण भील निम्बाहेडा
19 जून/बलिदान-दिवस भील बालिका कालीबाई का बलिदान 15 अगस्त 1947 से पूर्व भारत में अंग्रेजों का शासन था। उनकी शह पर अनेक राजे-रजवाड़े भी अपने क्षेत्र की जनता का दमन करते रहते थे। फिर भी स्वाधीनता की ललक सब ओर विद्यमान थी, जो समय-समय पर प्रकट भी होती रहती थी। राजस्थान की एक रियासत डूंगरपुर के महारावल चाहते थे कि उनके राज्य में शिक्षा का प्रसार न हो। क्योंकि शिक्षित होकर व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो जाता था; लेकिन अनेक शिक्षक अपनी जान पर खेलकर विद्यालय चलाते थे। ऐसे ही एक अध्यापक थे सेंगाभाई, जो रास्तापाल गांव में पाठशाला चला रहे थे। इस सारे क्षेत्र में महाराणा प्रताप के वीर अनुयायी भील बसते थे। विद्यालय के लिए नानाभाई खांट ने अपना भवन दिया था। इससे महारावल नाराज रहते थे। उन्होंने कई बार अपने सैनिक भेजकर नानाभाई और सेंगाभाई को विद्यालय बन्द करने के लिए कहा; पर स्वतंत्रता और शिक्षा के प्रेमी ये दोनों महापुरुष अपने विचारों पर दृढ़ रहे। यह घटना 19 जून, 1947 की है। डूंगरपुर का एक पुलिस अधिकारी कुछ जवानों के साथ रास्तापाल आ पहुंचा। उसने अ...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें